कुछ नहीं कर पाएंगे (डॉ. विवेक कुमार)

आज,
तोड़े जा रहे हैं पहाड़
अंधाधुंध काटे जा रहे हैं पेड़
किये जा रहे हैं
विज्ञान के नित नए आविष्कार।

धरती के गर्भ को भी
क्षत-विक्षत करने का
जारी है सिलसिला ।

पर अब रोज-रोज के
इन अत्याचारों से
सुगबुगा रही है धरती
बदल रहे हैं मौसम के मिजाज
जल रहा है आसमान
उबल रहे हैं
दोनों ध्रुवों के हिमखंड ।

आएगा एक दिन
जब प्रकृति के कोप
के आगे हम नतमस्तक हो जाएंगे
लाख चाहकर भी
अपने बचाव के लिए
हम कुछ नहीं कर पाएंगे।

तेली पाड़ा मार्ग, दुमका, झारखंड।
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

26 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 05/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/04/2017
  4. Kajalsoni 05/04/2017
  5. babucm babucm 06/04/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/04/2017
  7. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  8. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  9. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  10. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  11. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  12. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  13. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 06/04/2017
  14. mani mani 08/04/2017
  15. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 09/04/2017
  16. Dr.Anand Dr.Anand 09/04/2017
  17. poonamshree 09/04/2017
  18. Awadhesh 09/04/2017
  19. vikram 09/04/2017
  20. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 09/04/2017
  21. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 09/04/2017
  22. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 09/04/2017
  23. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 09/04/2017
  24. Dushyant 09/04/2017
  25. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 10/04/2017

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