ग़ज़ल

मुझे पाने की हसरत दिख रही है तेरी आँखों में |
रखे है आज भी जिन्दा मुझे अपनी तू सासों में ||

कभी तुमने वफ़ा की आरजू की थी सनम मेरे |
रहा मैं सिर्फ जिन्सी भूख तक तेरी ही बाँहों में ||

ग़ज़ल सी ही रवानी को लिये तू आज भी दिलबर |
नज़ाक़त दिख रही मुझ को वही सब तेरी बातों में ||

हँसी की हर अदा ले जी रही हर ग़म छिपा कर तू |
मुझे ढूंढे नज़र दिलबर तेरी है आज भी राहों में ||

“मनी” बन कर रहेगा उम्र भर दोषी सनम तेरा |
रखी तस्वीर मेरी तूने क्यों दिल की फ़िज़ाओं में ||

मनिंदर सिंह “मनी”

22 Comments

    • mani mani 05/04/2017
  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/04/2017
    • mani mani 05/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
    • mani mani 05/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/04/2017
    • mani mani 05/04/2017
  4. sarvajit singh sarvajit singh 05/04/2017
    • mani mani 05/04/2017
  5. C.M. Sharma babucm 05/04/2017
  6. mani mani 05/04/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/04/2017
      • mani mani 05/04/2017
        • mani mani 05/04/2017
          • C.M. Sharma babucm 07/04/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 05/04/2017
    • mani mani 05/04/2017
  8. Kajalsoni 05/04/2017
    • mani mani 05/04/2017
  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/04/2017
    • mani mani 05/04/2017

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