ग़ज़ल

मेरी पलकों की नगरी में तेरी नजर नहीं मिली
तुझे बहुत ढुँढा तु मगर नहीं मिली

जी करता है तेरे चेहरे का चित्र बनाऊँ
पर बनाने की रब से हुनर नहीं मिली

बहुत दुँआ की तुझे पाने के लिए
तुझे पाने की मेरे हाथ में लकीर नहीं मिली

जो पत्र लिखा वह तो अख़बार बन गया
उस अख़बार से भी तुझे खबर नहीं मिली

– स्मित परमार

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 04/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
  3. Kajalsoni 05/04/2017

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