कविता :– माटी मेरे खेत की, कवि:– अमन नैन

माटी मेरे खेत की 

लगे स्वर्ग से प्यारी सै

कुदरत से मिली मुझे

सौगात न्यारी सै

फर्ज माँ का यह

निभा रही सै

चीर कर छाती अपनी

पेट हमारा भर रही सै

चंदन भी शर्मा जा

ऐसी खुश्बू तेरी सै

माटी मेरे खेत की

लगे स्वर्ग से प्यारी सै

कण कण मे शक्ति ऐसी कि

संसार भी कदमो मे झुक जा सै

गरीबो को राजा तूने

अपने हाथो बनाया सै

मिलता है सकून दिल को

करके दर्शन  माटी के

अमन कैसे कर्ज उतारेगा

इस माटी के अहसानो का

माटी मेरे खेत की

लगे स्वर्ग से प्यारी सै

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 04/04/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
  4. Kajalsoni 05/04/2017

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