तेरे कूचे को वोह बीमारे-ग़म दारुश्शफ़ा समझे

तेरे कूचे को वोह बीमारे-ग़म दारुलशफा[1] समझे
अज़ल[2] को जो तबीब [3] और मर्ग [4] को अपनी दवा समझे

सितम को हम करम समझे जफ़ा को हम वफ़ा समझे
और इस पर भी न समझे वोह तो उस बुत से ख़ुदा समझे

समझ ही में नहीं आती है कोई बात ‘ज़ौक़’ उसकी
कोई जाने तो क्या जाने,कोई समझे तो क्या समझे

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