नफ़रत का अँधेरा – शिशिर मधुकर

जीवन में ये मुकाम जाने कैसा आ गया
नफ़रत का अँधेरा मेरे हर ओर छा गया

जिससे भी मैंने यहाँ फूलों की आस की
हर आदमी मुझको एक नश्तर चुभा गया

कोई साथ में आया बड़ी हिम्मत बटोर के
ज़माने के सितम देख के वो भी चला गया

कुछ ना दिया मैंने उसे आशाओं के सिवा
मुहब्बत की कसमें वो तब भी निभा गया

ज़माना हुआ आँसू जब इन आँखों से झरे
वो गया और अपने संग मुझको रुला गया

शिशिर मधुकर

16 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2017
  5. Kajalsoni 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2017
  6. mani mani 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2017
  7. sarvajit singh sarvajit singh 31/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/04/2017

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