उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया

उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया
अगर पाया तो खोज अपना न पाया

जिस इन्साँ को सगे-दुनिया[1] न पाया
फ़रिश्ता उसका हमपाया[2] न पाया

मुक़द्दर[3] से ही गर सूदो-ज़ियाँ[4] है
तो हमने याँ न कुछ खोया न पाया

अहाते से फ़लक़[5] के हम तो कब के
निकल जाते मगर रस्ता न पाया

जहाँ देखा किसी के साथ देखा
कहीं हमने तुझे तन्हा न पाया

किया हमने सलामे- इश्क़ तुझको!
कि अपना हौसला इतना न पाया

न मारा तूने पूरा हाथ क़ातिल!
सितम में भी तुझे पूरा न पाया

लहद[6]में भी तेरे मुज़तर[7] ने आराम
ख़ुदा जाने कि पाया या न पाया

कहे क्या हाय ज़ख़्मे-दिल हमारा
ज़ेहन पाया लबे-गोया [8] न पाया

शब्दार्थ:

  1. ↑ सांसारिक कुत्ता,व्यसन-लिप्त
  2. ↑ बराबर का
  3. ↑ भाग्य
  4. ↑ लाभ-हानि
  5. ↑ क्षितिज
  6. ↑ कब्र
  7. ↑ प्रेम-रोगी
  8. ↑ वाक-शक्ति

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