तरही गज़ल

तरही ग़ज़ल
22 22 22 22

दिल पे जितनी बार करोगे
जीना तुम दुस्वार करोगे

छोड़ सराफत भाईचारा
आखिर क्यों तकरार करोगे

मजहब के चश्मे के पीछे
बारूदी बौछार करोगे

अपनों के ही सीने पर तुम
छुपकर कितना वार करोगे

कलंक की कालिख में खुद ही
चौपट तुम घरबार करोगे

गलती पर गलती करके
कबतक यूँ इनकार करोगे

सबको धोखा देने वाले
*हमसे कितना प्यार करोगे*

डॉ छोटेलाल सिंह

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 30/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/03/2017
  3. vijaykr811 vijaykr811 30/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/03/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 30/03/2017
  6. Kajalsoni 30/03/2017

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