सुहाना सफर

जिन्दगी का ये कारवा चलता रहेगा
हर मोड पर कोई मिलता बिछुडता रहेगा
गम न करना दोस्तो अगर दे जाए आंखे मे आंसु कोई
बक्त किसी का नही होता एक दिन वो भी रोएगा

जिन्दगी ये सफर सुहाना है
बस जीने के लिए बहाना चाहिए
खुशिआ खुद दस्तक देती है दरबाजे पे बस
दहलिज को सजाना चाहिए

मुस्कुराता कौन है यहाँ
सब पत्थर का जीगर लिए बैठे है
कुछ तो मासुम है यहाँ कुछ किसी का दिल तोड कर बैठे है

जिन्दगी के ईस सफर मे मन्जिल सबको मिलती है
हर बाग मे यहाँ कलिआ खिलती है
जब भी मौका मिले दोस्तो मुसकुराते रहना
क्योकि यहाँ मुस्कुराने की बजह कम मिलती है

(गुरू देव सिह)