माँ, तुम्हारी बिटिया ……..भूपेन्द्र कुमार दवे

माँ, तुम्हारी बिटिया

 

मैं जन्मी हूँ तुम्हारी बिटिया कहलाने के लिये

जिन्दगी भर तुम्हारा असीम प्यार पाने के लिये।

 

मेरी मुस्कराहटें जरा गोदी में खिलने तो दो

तुम्हें भी जिन्दगी मिलेगी यूँ मुस्कराने के लिये।

 

चहकती, फुदकती दिखेगी यह तुम्हारे आँगन में

तुम्हारे आँगन की माटी यह महकाने के लिये।

 

अभी तो एक कली ही हूँ मैं शबनम से धुली हुई

छिपी हूँ तिरे आँचल में, माँ, तुझे रिझाने के लिये।

 

खिल उठूँगी फुलवारी में थोड़ा सब्र तो करो, माँ

तुम भी कहोगी बेटी है ही घर सजाने के लिये।

 

घर की रौनक हूँ, रोशन हमीं से है दुनिया सारी

भर लायी हूँ प्यार की अशर्फियाँ लुटाने के लिये।

 

ये आँसू भी तुम्हारे, ओ पापा, खुशी के होंगे

सजावोगे जब डोली मुझे बिदा कराने के लिये।

 

सगाई के उस दिन तो तुम माँ, दिखती तो खुश थी

अब पापा से कहो तुम ही कुछ मुस्कराने के लिये।

 

दे दो आशीष प्यारा जो तुमने हर वक्त दिया था

मुस्कराओ माँ, बस इक बार मन बहलाने के लिये।

 

होती है ही बिटिया पराया घर सजाने के लिये

मैं भी जाऊँ तुम्हारी बिटिया कहलाने के लिये।

 

आऊँगी, जाऊँगी सदा हँसने हँसाने के लिये

नातिन संग नाना-नानी को गुदगुदाने के लिये।

 

मैं जन्मी हूँ तुम्हारी बिटिया कहलाने के लिये

जिन्दगी भर तुम्हारा असीम प्यार पाने के लिये।

 

              ……..भूपेन्द्र कुमार दवे

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4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 30/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/03/2017
  4. Kajalsoni 30/03/2017

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