।।सच्चाई।।

जो बैठे है हम  साथ आज ना जाने फिर कभी करीब हो न हो

ये जिन्दगी के हंसीन पल न जाने फिर कभी नसीब हो न हो ।

समेटे रखना हमे अपनी यादो मे क्या पता एैसे लम्हे फिर कभी नसीब हो न हो

बख्त का क्या भरोसा आज आपके साथ है फिर कभी करीब हो ना हो।

किसी रोज सोचना बैठ कर ईतमिनान से न जाने फिर कभी वो सुकुन नसीब हो न हो ।

क्या पता आपकी जिन्दगी के सबसे हंसीन मोड पर हम आपके करीब हो न हो।

जब भी मौका मिले तो लबो पे मुस्कुराहट सच्ची रखना “दोस्तो” न जाने फिर कभी सच्ची मुसकुराहट नसीब हो न हो।

क्या पता हमारे बाद बेबजा हंसाने वाला कोई आपके करीब हो न हो।

 

(गुरू देव सिह)

 

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/03/2017
  2. sunny thakur 28/03/2017
    • Guru dev singh Guru dev singh 28/03/2017
  3. Guru dev singh Guru dev singh 28/03/2017
  4. Kajalsoni 29/03/2017
    • Guru dev singh Guru dev singh 29/03/2017
  5. C.M. Sharma babucm 29/03/2017
    • Guru dev singh Guru dev singh 29/03/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
    • Guru dev singh Guru dev singh 29/03/2017

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