मोक्ष सी बोली(हाइकु)…….काजल सोनी

चलो सखी रे
यमुना तट पर
बना कर टोली |

सच्चे मन से
ढुंढे मनमोहन
सा हमजोली |

मधुर प्रेम
हो रस जीवन में
इच्छा है तोरी |

है जीवन में
पीड़ा वेदना और
आँखमिचौली |

पार करेंगे
बन के पतवार
वो नैया मोरी |

बजा दे बंसी
मगन मुग्ध नाचु
कर ठिठोली |

लागी अगन
तरसे तन मन
तृप्ति हो थोड़ी |

पुकारे राधे
प्रेम में रमे सभी
गाँव की गोरी |

मन बसिया
न तरसा सुना दे
मोक्ष सी बोली
|

“काजल सोनी ”

8 Comments

  1. KaviKrishiv KaviKrishiv 29/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 29/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 29/03/2017
  6. vijaykr811 vijaykr811 29/03/2017
  7. babucm babucm 29/03/2017
  8. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/03/2017

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