मैं दीप हूँ मुझे रोशन रखो —- भूपेन्द्र कुमार दवे

मैं दीप हूँ मुझे रोशन रखो

अपने करीब उजाला मन रखो।

 

जलने बुझने का खेल अजब है

जिन्दगी को इसी में मगन रखो।

 

दुआ होती है बूँद नूर की

जिगर में उम्मीद की किरन रखो।

 

सीखना तो परिंदों से सीखो

उड़ान जितना, ऊँचा गगन रखो।

 

आखरी साँस तक ही जीना है

जीवन में जीने की तपन रखो।

 

चलो तो बस खुदा की राह चलो

चिराग उसी के दम रोशन रखो।

 

——- भूपेन्द्र कुमार दवे

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3 Comments

  1. babucm babucm 27/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/03/2017

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