मैं किसान कहलाता हूँ

शीर्षक- मै किसान कहलाता हूँ

मै आग उगलते आसमान की ही छाया में
उम्मीद सैंकड़ो लेकर बैल चलाता हूँ
हाँ, मैं किसान कहलाता हूँ ;
ये बेमौसम बरसात सहीं
आंधी,सूखा,पाला झेला
पर फिर भी भारतवर्ष को
निज भूमि का अन्न खिलाता हूँ
हाँ, मै किसान कहलाता हूँ ;
जिनको किसान प्रतिनिधि मानकर
चुनकर सत्ता में भेजा
उनकी उपेक्षा सहकर भी
मै अन्नदाता होने का फ़र्ज़ निभाता हूँ
हाँ, मै किसान कहलाता हूँ ;
जिस मिट्टी में खेल कूद के बड़ा हुआ
उस अन्नपूर्णा धन्यधरा की सेवा में
अपना सर्वश्व लगाता हूँ
हाँ, मै किसान कहलाता हूँ

-रणदीप चौधरी ‘भरतपुरिया’✍
7742944898

9 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 27/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 27/03/2017
    • Randeep Choudhary Randeep Choudhary 27/03/2017
  3. babucm babucm 27/03/2017
  4. Randeep Choudhary Randeep Choudhary 27/03/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/03/2017
    • Randeep Choudhary Randeep Choudhary 29/03/2017
  6. Kajalsoni 28/03/2017
    • Randeep Choudhary Randeep Choudhary 29/03/2017

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