अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्रा

किसी की चूड़ियाँ टूटेंगी,
कुछ की उम्मीदे मुझसे
विदा लेगी रूह जब
मुस्करा कर मुझसे
कितनी बार बुलाने पर भी जो
रिश्ते नहीं आये
दौड़ते चले आएंगे वो तब
आँशु बहाये
कितने आँशु गिरेंगे तब
जिस्म पर मेरे
रुख्सती में सब खड़े होंगे
मेरी मिटटी को घेरे ||

अंतिम बार फिर नहलाया जायेगा
बाद सजाया जायेगा
अंतिम दर्शन है जल्दी आओ
कुछ को बुलाया जायेगा
अंतिम यात्रा होगी पर
मेरे कदम न हिलेंगे
कांधों पर लेकर कब तलक
सब दूर ले चलेंगे
समुन्दर कि जिसका कोई छोर नहीं
आँशु है सबके जल्दी रुकेंगें
शमशान तक सब जोश से आएँगे
घर पहुचने पर थकेंगे ||

जब अंतिम बार जला होगा
शरीर, मरघटी में
मेरी राख बहा दी गयी होगी
पानी की तलहटी में
ब्रह्मभोज खिलाओगे तुम कुछ
ब्रह्मिनो को बुलाकर
मेरी यादो समेट दोगे तस्वीर पर
फूलमाला चढ़ाकर
मेरी लाठी, मेरा चश्मा, मेरी डायरी
छिपा दोगे
मेरी शक्सियत का हर एक निशान
मिटा दोगे ||

क्या कोई मुझे भी याद करेगा?
मेरे बारे में कुछ बात करेगा,
उनकी सदा मुझ तक पहुचे कैसे भी
ऐसी क्या कोई फ़रियाद करेगा ||

 

12 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/03/2017
    • shivdutt 27/03/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/03/2017
  4. C.M. Sharma babucm 27/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/03/2017
  6. Kajalsoni 28/03/2017

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