तू चमन का एक फूल है

तू चमन का एक फूल है
तो क्या हुआ
मैं राह की एक धूल हूँ
तो क्या हुआ ?

दम से तेरे गुलशन, गुलज़ार है
महक से तेरे, फ़िज़ा में बहार है
माला का तू सिंगार है
बनता तुम्हीं से हार है।

तुमको तो ख़ुद पे नाज़ है
मुझको भी ख़ुद पे नाज़ है
सर का अभी तू ताज़ है
मेरी ज़िंदगी भी एक राज़ है-

मैं भी कभी एक फूल था
झूमता था डाल पर
इठला रहा था शान से
खिला हुआ था बाग़ में;

तोड़ा गया, सर पर चढ़ा
नीचे गिरा, कुचला गया
तपता गया मैं धूप में
फेंका गया फिर आग में;

हवा ने फिर मुझको उड़ाया
धूल में मुझको मिलाया
ख़ाक से जो मैं बना था
मिल गया फिर ख़ाक में।

ख़ुश है तू अपने हाल पर
मैं ख़ुश हूँ अपने हाल पर
तेरा भी अपना ख्याल है
मेरा भी अपना ख्याल है;

ऐ चमन के फूल, सबको
तुझसे प्यार है, दुलार है
धूल बना, जीवन मेरा
अब रास्ते का आधार है।।

तू चमन..
… र.अ. bsnl

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