तेरी बगिया में मेरा क्या काम …. भूपेन्द्र कुमार दवे

 

तेरी बगिया में मेरा क्या काम

इसमें है सुन्दर फूलों की शान।

 

ओस कहे मैं फूलों की हूँ

कलियों पर ही मैं इठलाऊँ

मेरे  आँसू तप्त  कणों से

इनको यहाँ कहाँ बरसाऊँ।

 

तेरी बगिया है इक सुख की खान

इसे  कहाँ मेरे दुःख  की पहचान

तेरी बगिया  में  मेरा  क्या काम

इसमें है  सुन्दर  फूलों  की शान।

 

खुशबू है बस  तेरी महिमा

पवन संग मधु गीत सुनाती

मेरी  आहें  और  निराशा

पीड़ा का दुःख दर्द सुनाती।

 

तेरी  बगिया का सुन्दर परिधान

और कफन यह मेरा क्षूद्र समान

तेरी  बगिया में  मेरा क्या काम

इसमें है  सुन्दर फूलों  की शान।

 

इसमें नीड़ों  की  ममता है

स्नेह भरा  भ्रमरों का गुंजन

मैं हूँ  बस  कैदी साँसों का

सुनता हूँ बस अपना क्रन्दन।

 

तेरी बगिया का शाश्वत अभिमान

काया  मेरी  नश्वरता  की आन

तेरी बगिया  में  मेरा क्या काम

इसमें है  सुन्दर फूलों  की शान।

 

मैंने   चाहा  बच्चों  जैसा

इस बगिया में  खेलूँ  दौडूँ

पर शैतान समझकर मुझको

वे सब भागे, मैं क्या  बोलूं।

 

वे छोटे नन्हें  हैं  सब नादान

कैसे मैं उनको दे सकता ज्ञान

तेरी बगिया में मेरा क्या काम

इसमें है सुन्दर फूलों की शान।

 

कुसुम कलियाँ सारी विकल हैं

पाने   तेरा  अनुपम  पराग

पर  मेरी यह कलुषित काया

धुल कणों  से  रखे अनुराग।

 

तेरी बगिया के  हर कण में प्रान

पर यह तन है माटी का अपमान

तेरी बगिया में  मेरा  क्या काम

इसमें है  सुन्दर  फूलों की शान।

…. भूपेन्द्र कुमार दवे

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 25/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/03/2017
  4. Kajalsoni 25/03/2017

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