*नयन नीर की लकीर*
*(अतुकांत)*

हैं कुछ सूखी
आँसुओ की लकीरें,
जो बनती हैं
भावों के प्रबल दबाव से
हृदय से
पलकों से
हाँ इन्हीं अधखुली पलकों से
ढुलक कर
गर्म गर्म
यादों की तरह
किसी जज्बात में
किसी की याद में
कुछ छिपाये हुए
चुपचाप मगर
सब कुछ कह देते,
बता देते
जता देते,
हमारे बीच की प्रीति
नेह,समर्पण,
का पैमाना बन कर,
जब तुम जाते हो
हर बार
छोड़ कर
उन्ही सूखे रास्तों पर
जो सजे हैं
हमारे (मेरे और तुम्हारे)
नयन नीर से…..
गर्म और सुर्ख…
यही तकदीर
वही लकीर…

-‘अरुण’

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 25/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/03/2017
  4. Kajalsoni 25/03/2017

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