कितनी आसानी से मशहूर कर दिया है खुदा ने —– भूपेन्द्र कुमार दवे

कितनी आसानी से मशहूर कर दिया है खुदा ने
उतार मुझे सूली से खुद को चढ़ा लिया है खुदा ने।

कितनी अनोखी सौगात वो देता रहा है मुझको
अपने अश्क मेरी आँखों अब के दिया है खुदा ने।

अब के साल गिरह में देखना वो तोहफा न लाये
हर बार इक बरस देने का वादा किया है खुदा ने।

आखरी साँस तलक तो सबको जीना ही होता है
मेरी हर साँस को आखरी बना दिया है खुदा ने।

मेरी बंद मुठ्ठी में रख कहा इसे मत खोलना
कैसे अब बताऊँ कि मुझे क्या क्या दिया है खुदा ने।

पकड़कर हाथ उसने ही मुझे चलना सिखाया था
अब बिन तडपे उठूँ कैसे सिखा दिया है खुदा ने।

मेरे पास जो बचा है खुदा का दिया ही बचा है
मेरे पाप सब नोंचकर तो फेंक दिया है खुदा ने।

अब ना कहना कि मैं तो यूँ ही बेमौत मर गया हूँ
यूँ उठाकर उसी ने मुझे अपना लिया है खुदा ने।

—– भूपेन्द्र कुमार दवे
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2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 25/03/2017
  2. Kajalsoni 25/03/2017

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