मुझको छोड़ के – अजय कुमार मल्लाह

मैं तलाशती रही इस सवाल का जवाब,
कि क्यूं तोड़ गया वो मेरा हर ख़्वाब,
हर पल भगवान से मांगा जिसे हाथ जोड़ के,
वो चला गया क्यूं अकेला मुझको छोड़ के।

किसी और की बाहों में क्या हासिल किया उसने,
फिर अपनी खुशियों में मुझे ना शामिल किया उसने,
एक बार भी ना देखा मेरी ओर मुख मोड़ के,
वो चला गया क्यूं अकेला मुझको छोड़ के।

अब क्या हक़ मेरा उसपे जो उससे पूछूँ मैं ये बात,
क्यूं किया मुझे तन्हा क्यूं छोड़ा है मेरा हाथ,
दिल्लगी की मुझसे क्यूं गया मेरा दिल तोड़ के,
वो चला गया क्यूं अकेला मुझको छोड़ के,
वो चला गया क्यूं अकेला मुझको छोड़ के।

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 24/03/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/03/2017
  4. Kajalsoni 24/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/03/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/03/2017

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