करो वंदना स्वीकार प्रभो

करो वंदना स्वीकार प्रभो

वासना से मुक्त हो मन,
    हो भक्ति का संचार प्रभो
जग दलदल के बंधन टूटे
हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥

वाणासुर को त्रिभुवन सौपा
चरणों में किया नमस्कार प्रभो
भक्तो पर निज दृष्टि रखना
करुणा बरसे करतार प्रभो ॥

कण-२ में विद्धमान हो नाथ
तुम निराकार साकार प्रभो
दानी हो सब कुछ दे देते
दे दो भक्ति अपार प्रभो ॥

अनसुना बचा नहीं कुछ तुमसे
सुन लेना पापी की पुकार प्रभो
कुछ अच्छा मैंने किया नहीं
दयनीय पर करो विचार प्रभो ॥

हो नाम तुम्हारा अंतः मन में
कर दो दूर विकार प्रभो
विनती मेरी शरण में ले लो
करो वंदना स्वीकार प्रभो ॥

12 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  3. C.M. Sharma babucm 24/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/03/2017
  5. Kajalsoni 24/03/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/03/2017

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