एक कप चाय……. -प्रियंका ‘अलका’

 

मैं
मेरी उदासी
और एक कप चाय……..

ढलती हुई शाम
थमता हुआ शोर
थकता हुआ मन
और एक कप चाय……

उलझे रिश्ते
उलझे हालात
बेबस सोच
और एक कप चाय……….

बंद मुट्ठी से
रेत का फिसलना
पांवों के नीचे से
लहरों का बहना
देखते हीं देखते
उम्मीदों का बह जाना
और सम्हालने के लिए
बस एक कप चाय……..

दुविधा की गठरी
साँसो में अटकी
सन्नाटो की सिसकी
कमरे में पसरी
घड़ी की टिक-टिक
न कुछ कहती
न सुनती
अपने ही धुन में
बस बढ़ती जाती
और……
एक कोने में…..
सब सुनती- समझती
मैं
मेरी उदासी
और एक कप चाय………..
-अलका

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017
  2. babucm babucm 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017
  5. Kajalsoni 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/03/2017
    • ALKA ALKA 27/03/2017

Leave a Reply