मिट्टी का खिलौना हूँ – अजय कुमार मल्लाह

मिट्टी का खिलौना है जिस्म लोगों की नज़र में,
अब तो लगता नहीं अपना कोई भी इस शहर में,
पता पूछती फिरती हूँ कोई बता दे मौत का,
फांसी का फंदा अच्छा है या है सुकून ज़हर में।

किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा करें।

16 Comments

  1. babucm babucm 23/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2017
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 24/03/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  6. Kajalsoni 24/03/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/03/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/03/2017

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