फर्क

फर्क
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बेटे की सिरहाने के ऊपर
हिलने के साथ बजता था
झुनझुना
जिसे सुन वह न रोये
और उठने उठने की कोशिश के साथ
उसे पकड़ना चाहे
और उठते गिरते
कदमोंके साथ
वह चलना सीखे।

बेटी की जन्म होने पर
वह पड़ी रही मिट्टी पर
धरती माँ की गोद में
जिससे वह धरती माँ से
सहनशक्ति पा जांय
बेटी को और किस चीज की जरुरत ?

——– चंद्र मोहन किस्कु

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 23/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2017
  3. Kajalsoni 23/03/2017
  4. ALKA ALKA 23/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017

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