मैं लड़ूँगा

$मैं लड़ूँगा $
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मैं लड़ूँगा
बोमा -बारूद और बन्दुक से नहीं
दो पैर और दो हाथवाले मनुष्य से नहीं
जान जाने और खून बहाने के लिए नहीं
समाज में सुख-शांति के लिए
मैं लड़ूँगा -मैं लड़ूँगा।

मैं लड़ूँगा
समाज की एकतरफा और तंग
सोच के विरोध में
अन्धविश्वास के विरोध में
अशिक्षा के विरोध में
ज्ञान की दीपक जलाकर
मैं लड़ूँगा -मैं लड़ूँगा।

मैं लड़ूँगा
किसान जैसे धुप-वारिस
तूफान के बीच
अपनी खेतों में हल चलाते है
अच्छी फसल और भरपेट भोजन
के लिए
मजदुर कैसे दौड़ते हुए
पीठ और सर पर भर ढोते है
अपनी भाग्य चमकाने के लिए।

कलम जैसी तेज तलवार से
ज्ञान की हथियार से
साहस और चित्त को दृढ़कर
मैं लड़ूँगा -मैं लड़ूँग।

———– चंद्र मोहन किस्कु

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 22/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2017
  3. Kajalsoni 23/03/2017

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