तेरी याद में – अजय कुमार मल्लाह

हक़ीक़त से अलग होती है ख़्वाबों की दुनिया,
मैं हर ख़्वाब में तुझसे मुलाक़ातें करता हूँ।

मेरे सब दोस्त कहते हैं मैं हो गया हूँ पागल,
जब आजकल तेरी तस्वीर से बातें करता हूँ।

कोई खास मरासिम नहीं मेरा चाँद तारों से,
हवाले उनके तेरी याद में सब रातें करता हूँ।

रहे खैरियत से तु जहाँ भी रहे “करुणा”,
नमन पत्थर की मूरत को आते-जाते करता हूँ।

10 Comments

  1. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 21/03/2017
  2. mani mani 21/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/03/2017
  5. Kajalsoni 22/03/2017

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