सत्य

जिसे कहा औचित्यहीन, उसकी सत्ता का बल देखा।
जिसका नहीं अभाव कहा, उसका पोषक निर्बल देखा।
खेल रहा प्रारब्धबद्ध, पर उसको क्या पहचान सकोगे?
सत्य करमगति सैद्धान्तिक है, विभव-पराभव का लेखा।।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/03/2017

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