नेता जी की बल्ले-बल्ले।

लड़के से गलती हुई, कहता ‘बोले काम’।
पापा-चाचा को गिरा, खुद ही गिरे धड़ाम।।
खुद ही गिरे धड़ाम, रुको निकलेंगे किल्ले-
नेता जी की बल्ले-बल्ले।
अथ को माना इति जभी, तभी हुआ अवसान।
अनुभव की अहमियत को, अब कुछ समझो प्राण।।
अब कुछ समझो प्राण, काम नहिं मास्टर छल्ले।
नेता जी की बल्ले-बल्ले।
बेटे की दुर्दशा का, कुछ गम नहीं विशेष।
साथ-पसन्द ही करमगति, दुखदाई आवेश।।
दुखदाई आवेश, देश बाजारू गल्ले।
नेता जी की बल्ले-बल्ले।
हो पहाड़ मैदान ही समध्याना सामा्रज्य।
रावत-विष्ट विशेषकर नातेदारी राज्य।।
नातेदारी राज, सभी कुछ अपने पल्ले।
नेता जी की बल्ले-बल्ले।
बड़ी बहू का मायका रावत कुल है शान।
छोटी विष्ट विशिष्टतम जो हीरों की खान।।
जो हीरों की खान, मान उस पर रसगुल्ले।
नेता जी की बल्ले-बल्ले।

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