मात-प्रेम…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चौपाईII
दाम पड़ती छोटी जाए, कृष्णा उदर बंध ना पाए…
माँ लल्ला का बंधन चाहे, योगी भी पकड़ना चाहे…
माया धारी में जो उलझे,योग ज्ञान तप से ना सुलझे…
बलिहारी लीला पे जाऊं,बिना प्रेम कृष्ना ना पाऊं…
बन दामोदर कीन्हीं किरपा,बंधे मात प्रेम में कृष्णा…
पद पंकज तोरे है बिनती,बांधों ‘चंदर’ अपनी प्रीती…
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

दाम – रस्सी, डोरी
उदर – पेट

(नाचीज़ ने कृष्णा के उस ‘दामोदर रूप’ को शब्द देने की कोशिश की है जो बड़े बड़े योगियों ऋषिओं के ज्ञान से भी परे है…उसी की किरपा से भाव जागे…लिखा है…मेरा कुछ भी नहीं है इसमें सिवा बिनती के)

15 Comments

    • babucm babucm 22/03/2017
  1. mani mani 21/03/2017
    • babucm babucm 22/03/2017
    • Delores 21/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/03/2017
    • babucm babucm 22/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2017
    • babucm babucm 22/03/2017
  4. ALKA ALKA 22/03/2017
    • babucm babucm 22/03/2017
  5. Kajalsoni 22/03/2017
    • babucm babucm 23/03/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/03/2017
    • babucm babucm 24/03/2017

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