सुसंगत — दोहे — डी. के. निवातिया

दोहे

मोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव !
कोइ कथन औषधि बने, कोइ दे घने घाव !!………..(१)

दोस्त ऐसा खोजिये, बुरे समय हो साथ !
सुख में तो बहुरे मिले, संकट न आवे पास !!……..(२)

संगत ऐसी राखिये, जहां मिले सुविचार !
झूठा सारा जग भया, सुसंगत तारे पार !! ………(३)

विद्या मन से पाइये, जा में जग समाये !
जो भी इसमें रम रहा, सो सफल हो जाये !!………..(४)

करम ऐसे तुम कीजे, मन को ठंड मिल जाय !
रात चैन कि नींद मिले, दिन सुख से कट जाय !! …….(५)
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—::–डी. के. निवातिया —::–

18 Comments

    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  3. C.M. Sharma babucm 22/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  4. राकेश पांडेय 22/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  5. ALKA ALKA 22/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  6. Kajalsoni 22/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  7. Shyam Shyam tiwari 23/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017