मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई — डी के. निवातिया

ना पूछो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई
फ़ज़ीहत आजकल जमाने में आम हुई
जिस्म के भूखे है लोग, प्रेम क्या जाने
सुबह मिले, शाम तक काम तमाम हुई !!

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डी के. निवातिया

10 Comments

    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/03/2017
  1. babucm babucm 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/03/2017
  3. Kajalsoni 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/03/2017
  4. mani mani 21/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/03/2017

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