जिन्दगी क्या है

जिन्दगी क्या है यह तो वक्त बताता है

इसका मकसद भी वक्त बदलता जाता है।

 

जो मुहब्बत जताता है मुकर जाता है

जो मुहब्बत करता है हरदम निभाता है।

 

तूफाँ का उठाकर किनारे फेंक देना

जिन्दगी का अजीब नजारा दिखाता है।

 

जिन्दगी उम्मीद का एक पैमाना है

जब दरक जाता है तो अश्क बहाता है।

 

जिन्दगी जब भी मौत से डरने लगती है

डर हर इक साँस को रोककर डराता है।

              ——    भूपेन्द्र कुमार दवे

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/03/2017
  2. babucm babucm 20/03/2017
  3. Kajalsoni 20/03/2017

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