वो मेरी नही है – अजय कुमार मल्लाह

मेरे दोस्त तेरा कहना है कि वो मेरी नही है,
आखिर ये दिल क्यूं माने कि वो मेरी नही है।

देख! देख रही है उसकी तस्वीर भी मेरी तरफ़,
उसने अब भी मेरे चेहरे से नज़र फेरी नही है,
आखिर ये दिल क्यूं माने कि वो मेरी नही है।

चल तु कह रहा है तो कुछ तो सच्चाई होगी,
उसकी नागवार कोई हरकत दी दिखाई होगी,
या हो सकता है कि कोई वहम हुआ हो तुझे,
तुझे ये मनगढ़ंत बात किसी ने बताई होगी,
क्यूंकि ऐसा तु नहीं कहता, ये बात तेरी नही है,
आखिर ये दिल क्यूं माने कि वो मेरी नही है।

झूठ का श्रृंगार करना तो उसे आता ही नहीं,
वो खुद कहती है मेरे सिवा कोई भाता ही नहीं,
सिलसिलेवार वो मसला मुझे बता तो सही,
पर तु ख़ामोश है मुझसे कुछ बताता ही नहीं,
अंतर्मन में उसने कोई और प्रतिमा उकेरी नही है,
आखिर ये दिल क्यूं माने कि वो मेरी नही है।

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/03/2017
  3. babucm babucm 20/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/03/2017
  5. Kajalsoni 20/03/2017

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