तेरा नाम मेरी तक़दीर से – अजय कुमार मल्लाह

मुझपर क्यूं इतना सितम ढाए जा रही है ज़िन्दगी,
तेरा नाम मेरी तक़दीर से, मिटाए जा रही है ज़िन्दगी।

मौत से पहले ना तुझको मैं भुला बैठूँ,
इसलिए हर लफ्ज में तेरी तारीफ़, लिखाए जा रही है ज़िन्दगी।

दोष देता हूँ खुद को समझता हूँ मैं गुनहगार,
क्यूं नहीं पा सका तुझे गर करता था सच्चा प्यार,
होजा हकीक़त से रूबरू, बताए जा रही है ज़िन्दगी,
तेरा नाम मेरी तक़दीर से, मिटाए जा रही है ज़िन्दगी।

क्या झूठा है मेरा प्यार फरियाद मेरी सच्ची नहीं,
फिर लोग क्यूं कहते हैं इतनी दीवानगी अच्छी नहीं,
हर जीत में मुझे हार, दिलाए जा रही है ज़िन्दगी,
तेरा नाम मेरी तक़दीर से, मिटाए जा रही है ज़िन्दगी।

तु रूठी है अगर मुझसे तो मौका दे मनाने का,
हक़ मांगू मैं ज़रा-सा तुझसे प्यार जताने का,
मुझे तेरी चाहत में “करुणा”, रुलाए जा रही है ज़िन्दगी,
तेरा नाम मेरी तक़दीर से, मिटाए जा रही है ज़िन्दगी।

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 19/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/03/2017
  5. Kajalsoni 20/03/2017

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