जवाब – दोस्त के सवाल का – अजय कुमार मल्लाह

मेरा एक दोस्त कहता है ——
कि वो कैसे तुझपे इतने सितम ढा सकती है,
तुझे यूं रुलाकर खुद मुस्कुरा सकती है,
कितना प्यार करता है तु उससे आज भी,
और इतनी आसानी से वो तुझे भुला सकती है।

तो मैंने कहा ——
भूलना तो उसकी फितरत में नहीं था,
मुझको छोड़ के जाना उसकी हसरत में नहीं था,
फैसला ये उसका नहीं मनमर्जी खुदा की थी,
क्यूंकि शायद उसका प्यार मेरी किस्मत में नहीं था।

12 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 18/03/2017
  2. mani mani 18/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/03/2017
  4. C.M. Sharma babucm 18/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2017
  6. Kajalsoni 20/03/2017

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