“माँ” को समर्पित…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

IIछंद – चौपाईII

ऊषा किरणें चरण पखारें, पुरवाई चंवर झुलायें…
नाटक करते नटखट कान्हा, मूंदें आँखें ज्यूं सोने का…
बलिहारी लीला पे उसकी, श्याम सलोनी सूरत जिसकी ….
डांटे माँ ये चाह उसे भी, उँगली पे है जग यह जिसकी….

माँ की महिमा न-कही जाये, गुण जिसके तिर्देव भी गाये…
माँ चरणों में तीर्थ सारे, कहते वेद पुराण हमारे…
हो जाओ बडभागी कितने, तीर्थ घूमाओ तुम कितने…
त्रस्त किया है माँ को जिसने, पाप नहीं है उसके मिटने…

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/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

16 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/03/2017
    • babucm babucm 16/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/03/2017
    • babucm babucm 16/03/2017
      • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/03/2017
        • babucm babucm 16/03/2017
          • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/03/2017
          • babucm babucm 16/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/03/2017
    • babucm babucm 16/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/03/2017
    • babucm babucm 16/03/2017
  5. Kajalsoni 16/03/2017
    • babucm babucm 17/03/2017
    • babucm babucm 18/03/2017

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