भारत स्वाभिमान बुनो |

मैं पत्थर भी हूँ पानी भी,
साहस की अगम कहानी भी |
मैं सिंहद्वार भी रक्षक भी,
मैं निर्मोही मैं भक्षक भी ||

इतिहास बोलता है मेरा,
मैं हूँ तरूवर की सी छाया |
पर सत्य वाणी सिद्धि हेतु ,
मैं अमिट काल मैं तक्षक भी ||

मैं हूँ तो तेरा सर्वस्व यहाँ,
मुझसे हीं तेरी ये काया है |
मुझको तू फकत सैनिक ना समझ,
सेना…. भारत का सरमाया है ||

क्या कश्मीर कहाँ बस्तर,
अरूणाचल का अक्साई चिन |
हम नहीं जानते कुछ भी कहीं,
भारत माता हैं सर्वागीण ||

जमाना जमाने से जानता है मुझको,
मैंने ना कभी तकरार किया |
निज ख्याति प्राप्ति की लालच में,
ना कभी किसी पर वार किया ||

तुम मेरे देश की मिट्टी के ,
नीरस कण से दिखाई पड़ते हो |
जिस लहू ने है तुमको सींचा,
तुम आज उन्ही से लड़ते हो ||

थोथी प्रसिद्धि बस पाने को,
व्याकुलता और व्यवधान ना बो |
तुमसे उम्मीद बहुत हमको,
निर्-अर्थक सब अरमान ना हो ||

वाणी विवेक और संयम से,
लबरेज धरा करना तुमको |
सत्य शक्ति साहस और शौर्य,
वीरों को अता करना तुमको ||

फिर उठो चलो बाहें थामो,
मातृभूमि सम्मान चुनो |
कर लो संकल्प अदम्य शिला,
भारत स्वाभिमान बुनो ||

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आशीष कुमार झा
धनबाद, झारखंड |
मो. — 09534170632

11 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/03/2017
    • आशीष कुमार झा 16/03/2017
  2. Nitish Guru 16/03/2017
  3. babucm babucm 16/03/2017
    • आशीष कुमार झा 16/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/03/2017
    • आशीष कुमार झा 16/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/03/2017
  6. आशीष कुमार झा 17/03/2017
  7. sumit jain sumit jain 18/03/2017
  8. आशीष कुमार झा 18/03/2017

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