आशा की प्रदीप

आशा की प्रदीप
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अंधकार की आँचल
छोड़कर
मैं सूर्यदेव की ओर
बढूँगा
दुःख और पराजय की
पथ पर
प्रदीप बहुत सारा
जलाऊँगा।


बुझती ख्वाहिश की डगर पर
आशा की प्रदीप जलेगा
कुछ अपनों से
कुछ दूसरों से
जलेगा।


मन में सुख और शांति की
सुनहरी अट्टालिका
स्मरण कर
सामने की कष्ट
दूर फ़ेंक कर
आशा की डगर पर
आगे बढ़ना होगा।

———-चंद्र मोहन किस्कु

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/03/2017

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