फासले दिल के…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जुस्तजू में ही, बिखर गए, सपने मेरे…
चर्चे भी हर तरफ, उम्मीद से, निकले मेरे….

वक़्त गुज़रा है, कुछ इस-तरहा, मेरा…
अपने ही रूप में, दुश्मन नज़र, आये मेरे….

रोज़ मिलते हैं, बिछड़ते हैं, मेरे दिल से….
गम भी तन्हा से, मुझ बिन अब, रहते मेरे….

रंग फीके हैं, तस्वीर-ऐ-महबूब, या फिर…
आईनें दिल के ही, धुंधले से, हो-गये मेरे….

अब न मैं हूँ, न ही तन्हाई है, कोई ‘चन्दर’…
फासले दिल के, दिल ही में, मिटे मेरे….
\
/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 15/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 15/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  5. Kajalsoni 15/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 15/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  7. mani mani 19/03/2017
    • C.M. Sharma babucm 21/03/2017

Leave a Reply