रावण बदल के राम हो जायेंगे—डी. के. निवातिया

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे।
इस शहरे-ऐ-अमन में, दंगे तमाम हो जायेंगे !!

न छेड़ो दुखती रग को, अगर आह निकली !  
नंगे यंहा सब इज्जत-ऐ-हमाम हो जायेंगे !!

देकर देखो मौक़ा लिखने का तवायफ को भी !
शरीफ़ इस शहर के सारे, बदनाम हो जायेंगे।।

दबे हुए है शुष्क जख्म इन्हें दबा ही रहने दो !
लगी जो हवा, दर्द फिर सरे-आम हो जायेंगे।।

सुना है दानव भी बस गये है आकर रघुकुल में !
अब जरूर सारे रावण बदल के राम हो जायेंगे।।
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डी. के. निवातिया  
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18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 14/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  3. आशीष कुमार झा 14/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 14/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 14/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  6. babucm babucm 15/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  7. Shyam Shyam tiwari 15/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  8. Kajalsoni 16/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017

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