बसंत

पुष्प खिले है पीले -पीले 

देखो बसंती अगवानी में, 

फाग खड़ा है द्वार हमारे 

पलाश- टेशू की मेजबानी में, 

राग विहाग रहा अलाप

भ्रमर अपनी ही रवानी में ,

ओढ़े नीली चुनर इठलाती

अलसी अपनी ही मस्तानी में 

राधारानी   हुई   विभोर 

कान्हा की बरसानी में ।

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/03/2017
    • Rosy Kumar 17/03/2017
  2. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 12/03/2017
    • Rosy Kumar 17/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
    • Rosy Kumar 17/03/2017
  4. babucm babucm 12/03/2017
    • Rosy Kumar 17/03/2017
  5. sumit jain sumit jain 13/03/2017
    • Rosy Kumar 17/03/2017

Leave a Reply