हे तमाश-बीं ये दुनिया,
तमाशा हो तुम;
बेतकल्लुफी से फेरेंगे निगाहें,
मन भर तो जाने दो ज़रा।

-प्रान्जल जोशी।

One Response

  1. sumit jain sumit jain 13/03/2017

Leave a Reply