खुशबू

खुली हवा में रखा हुआ पेट्रोल
जैसे उड़ने के बाद भी
छोड़ जाता है अपनी खुशबू
दिलाता है याद अपने होने की
वैसे ही
तुम भी छोड़ जाना
अपना एक हिस्सा मेरे भीतर
पिघलाना मुझे अंदर से
निकलकर बाहर आना
आँसुओं के साथ
दिलाना याद अपने होने की
छोड़ जाना अपनी खुशबू
अखबार के पन्नों में
सुबह की चाय में
घर की दीवारों में
और मुझमें

                                                                                  अमिताभ भट्ट ‘द्विज’

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/03/2017
  2. Kajalsoni 10/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/03/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/03/2017
  6. C.M. Sharma babucm 10/03/2017

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