मेरे हाथ लगी तन्हाई – अजय कुमार मल्लाह

दिल की किताब पे चली, वो स्याही थी प्यार की,
मेरे हाथ लगी तन्हाई, और तस्वीर यार की।

उसके सामने बैठूँ तो आँखें ना झुके,
उसे देखता जाऊँ मै तो बिना रुके,
अदाएं कर दे कत्लेआम, ज़रूरत नहीं हथियार की,
मेरे हाथ लगी तन्हाई, और तस्वीर यार की।

हर टूटते तारे से ये सिफ़ारिश की थी,
अपनी हर दुआ में मैंने ये गुज़ारिश की थी,
मिल के बिछड़े ना हम, ना घड़ी आए इंतज़ार की,
मेरे हाथ लगी तन्हाई, और तस्वीर यार की।

अपनी तक़दीर पे रोना मुझे आने लगा है अब,
उसका मुँह मोड़ के जाना सताने लगा है अब,
फिजूल लगती है ज़िन्दगी, कोशिश मेंं ऐतबार की,
मेरे हाथ लगी तन्हाई, और तस्वीर यार की।

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/03/2017
  2. Kajalsoni 09/03/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/03/2017
  4. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 10/03/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 10/03/2017
  6. vijaykr811 vijaykr811 10/03/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/03/2017
  8. C.M. Sharma babucm 10/03/2017
  9. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/03/2017

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