Five Popular Lines Of Alok Upadhyay

1.छोटीसी जिंदगी बची हैं मेरी ,
हँसते-हँसते काट रहाँ हूँ …,
वक्त नही हैं रोने का
फिलहाल खूशियाँ बाँट रहा हूँ …!

2.कहते हैं अकसर सब मूझसें
बडा अजीब हैं यार तेरा …,
अब उनहें क्या बताऊ ,
वह रोज बने त्योहार मेरा … !

3.हम भारतीयों का मन पंसद काम ..,
पीते रहो चाय ,
सबको देते रहों राय …!

4.भला क्या बूरा क्या
हम हर लम्हा सह जाते है …,
आदत पड गई ऐसी
अब तो दर्द में भी मुस्कुराते हैं …!

5.साहित्य मेरी जिदंगी
संगीत मेरा संसार …,
इन सबके आगे
माँ सरस्वती का दरबार …!

 

Poet Alok Upadhyay At Raj Ghaat

Poet Alok Upadhyay At Raj Ghaat

 

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/03/2017
  2. Kajalsoni 08/03/2017
  3. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 08/03/2017
  4. babucm babucm 08/03/2017

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