इश्क की सजा—-मनिंदर सिंह “मनी”

कभी नीले आसमाँ के तले,
हमनवां मुझे थे तुम मिले,
नीले सागर के किनारे,
नैन से नैन मिले हमारे,
बैठा सपनो की किश्ती में,
वादे हुये दिल की बस्ती में,
खुशुबू तेरी है इस फ़िज़ा में,
तू जाने कहाँ अपनी रजा में,
पर “मनी” मैं वही आज भी,
कैद तेरे इश्क की सजा में

मनिंदर सिंह “मनी”

18 Comments

    • mani mani 08/03/2017
  1. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 07/03/2017
    • mani mani 08/03/2017
  2. Kajalsoni 07/03/2017
    • mani mani 08/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
    • mani mani 08/03/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/03/2017
    • mani mani 08/03/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/03/2017
    • mani mani 08/03/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/03/2017
    • mani mani 08/03/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/03/2017
    • mani mani 09/03/2017
  8. babucm babucm 08/03/2017
    • mani mani 09/03/2017

Leave a Reply