शायरी इस शायर की – अजय कुमार मल्लाह

तेरे दीदार को तरसे, हम तेरे प्यार को तरसे
मोहब्बत के थे वो बादल, जो मुझपर ही नहीं बरसे।

समन्दर सा है तेरा मन, है रंगत ओस की बूँदे,
बदल जाए मेरी तक़दीर, गर तु एक बार मुझे छू दे।

तेरे लबों पे नाम मेरा, मुद्दतों के बाद आया,
अच्छा हुआ मेरी जान तुझे, कभी तो मै याद आया।

किसी को नसीब समन्दर हुआ, मेरी तक़दीर में छींटे नहीं,
महल हो खड़ा सपनों का जिनसे, मेरे पास वो ईंटे नहीं।

10 Comments

  1. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 07/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/03/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/03/2017
  5. babucm babucm 07/03/2017

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