हैसियत – अजय कुमार मल्लाह

सलामत धड़कन रहती है, दिल तो टूट जाते हैं,
जो नसीब में नहीं होते, वो हाथ छूट जाते हैं,
कोशिश बस इतनी करना किसी का दिल ना दुखे,
क्यूंकि रूठने वाले तो, बेवजह रूठ जाते हैं।

दोष अक्सर लोग, मुकद्दर को दिया करते है,
अपनी नज़र से अपनों को, बेक़दर किया करते हैं,
जब अंदाज़ा होता है मोहब्बत की कीमत का,
तब दर्द के सफ़ीने में, सफर किया करते हैं

हर इल्ज़ाम से बड़ा इल्ज़ाम, बेवफाई का होता है,
महफ़िल से भी ज्यादा शोर, तन्हाई का होता है,
जहाँ खुद की ही यादें खुद को परेशान कर देती हैं,
वहाँ सबसे ज्यादा दर्द, जुदाई का होता है।

ये तो दुनिया जानती है, कैसी नियत है मेरी,
तु अपना बता, कैसी तबियत है तेरी,
मेरी मोहब्बत है तु, इतना तो जान ही सकता हूँ,
पर नहीं ! फिर भी तेरे आगे, क्या हैसियत है मेरी।

अजय कुमार मल्लाह “Karuna”

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/03/2017
  2. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 07/03/2017
  3. Kajalsoni 07/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/03/2017
  6. babucm babucm 07/03/2017

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