Daastan Vajood Ki

टूटे हुए अल्फाज़ ही सही ,पर एक दास्तान तो है,
ज़िन्दगी अधूरी ही सही ,पर एक फलसफा तो है|
देखे हैं कितने ही वजूद मिटते यहाँ ,
पर देखे हैं सिकंदर भी बनते यहाँ |
देखे हैं कितने ही रंग बिखरते यहाँ
पर देखे हैं इन्द्रधनुष भी बनते यहाँ|
माना बहुत शिकायतें है,पर चाहतों का काफिला भी तो है||

तिनको जैसे बिखरे ही सही ,होसला तो है,
मंजिल क्षितिज के उस पार ही सही,पर राह तो है|
देखे हैं कितने ही सपनो की बोली लगते यहाँ,
पर देखा है ख्वाबो की कश्तियो को तैरते भी यहाँ |

गुमराह ही सही है,पर कदमो के निशान तो है,
गुमनाम ही सही पर ,एक चेहरा तो है|
माना कोई वजूद नहीं अभी पर आने वाला कल तो है ||

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/03/2017
  2. Kajalsoni 07/03/2017
  3. babucm babucm 07/03/2017
  4. mani mani 08/03/2017

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