ब्रज की होली में -शिशिर मधुकर

रंग ना भरो जीवन में तो जीना मुश्किल हो जाता है
लंबी राहों में तन्हा चल के आनन्द ना कोई आता है
जहाँ प्रेम बसता हो मन में एक आकर्षण हो बोली में
ऐ वक्त मुझे तू ले चल संग में ऐसे ब्रज की होली में

जिसने भी जीवन को यहाँ पर लाभ हानि में तोला है
रिश्तों के पकवानों में उसने कोई अमृत ना घोला है
एक अटूट सा दिल का बन्धन डाल दो मेरी झोली में
ऐ वक्त मुझे तू ले चल संग में ऐसे ब्रज की होली में

वातावरण अगर पुनीत है एक लाभ सभी को होता है
खुश मिजाज लोगों के संग सबका दिल खुश होता है
मुझको भी शामिल करवा दो ऐसे लोगों की टोली में
ऐ वक्त मुझे तू ले चल संग में ऐसे ब्रज की होली में

जब मन में कोई पाप ना हो हर इंसा अच्छा लगता है
द्वेष रहित संसार में कोई तब अपनों को ना ठगता है
गोपियाँ यही सुख पाती हैं कान्हा से आँख मिचोली में
ऐ वक्त मुझे तू ले चल संग में ऐसे ब्रज की होली में

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/03/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 06/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/03/2017
  4. C.M. Sharma babucm 07/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  5. mani mani 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/03/2017

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